हवा ओ हवा
मुझे अपना दोस्त बना,
जैसे तू चले, मुझे भी चला
उमंगों में तरंगों में ,
कभी ज़मीन पर, कभी आसमाँ में,
हवा ओ हवा......
मुझे अपना दोस्त बना...
संग पाकर, शायद में भी हवा ही हो जाऊं
भूल जाऊं खुद को,
में भी तुम हो जाऊं, हवा ओ हवा.....
मौज में, मस्ती में
लह लहाना तुम्हारा,
या कभी पूर्ण मौन हो जाना तुम्हारा,
मुझे बहुत भाता है
ललचाता है, बस तुम हो जाने को, हवा ओ हवा......
तुम ही हर पल हर जगह, पर
तुम कभी होती नहीं आँखों के सामने
बस एक खालीपन होता है ,
या फिर एक हलचल सी फिजा में
बस,
मुझ में भी कुछ ऐसा भरदो ना
कि,
मैं ना रहूँ खुद को ना खो कर भी,
हवा हो हवा......
हवा होना, बस खुदा होना
खुद से ना खुद का जुदा होना,
अपनी ही एक-एक रग में हो आना जाना
यही है हवा में हवा होना,
हवा ओ हवा,
मुझे अपना दोस्त बना.....
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