I LOVE KIDDIES
EVERYONE DOES
WHO DON'T WHO IS
IF DESIRES SEE GOD IN THEM
GET 'HIS' LOVE BY LOVING THEM
THEY ARE TEEN
ONLY LOVE WHAT THEY KEEN
LARKING AND SWINGING AS
LARK SPURS FLOWERS IN SPRING
REJOICING IN TORSION AS MUCH
AS NOT MAY BE KING.
ULTIMATE GOAL of life is to attain HAPPINESS. Simply JO HOTA HAI HONE DO. Whenever such simple feeling arises in me, I feel myself spacious, healthy and airy. Is it HAPPINESS>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>> YES.............It is............It is.......only.
Monday, August 9, 2010
LIFE
ठंडी हवा से जब जुल्फ
आँखों पर आती है
कुछ धूप सी होती है
तो चेहरे पर छाब हो जाती है
बारिश कि नन्ही नन्ही बूंदों से
जब तन भीग जाता है
जहन में ताज़गी उभर आती है
मन भी धुल जाता है
जब आंखे हरियाली को अपने
में समां लेती है
पते पर पड़ी बूँद भी
मोती बन जाती है
जिंदगी का एहसास होता है
जब आकाश में मस्त पक्षी उड़ते है
मेरा बदन भी फाड़ फाड़ने लगता है
और चिंतन को पर लग जाते है
जब इन्हें किल्कारिया भरते देखता हूँ
मुजहे अपना बचपन याद आता है
पकड़ने लगता हूँ उस वक़्त को
जब यह वक़्त काटने लगता है
गुलाब के फूल दे देते है
खुशबू हर इक को
मिटाना चाहता हूँ नाम संगदिली
बना देना चाहता हूँ दिलदार हर इक को
आँखों पर आती है
कुछ धूप सी होती है
तो चेहरे पर छाब हो जाती है
बारिश कि नन्ही नन्ही बूंदों से
जब तन भीग जाता है
जहन में ताज़गी उभर आती है
मन भी धुल जाता है
जब आंखे हरियाली को अपने
में समां लेती है
पते पर पड़ी बूँद भी
मोती बन जाती है
जिंदगी का एहसास होता है
जब आकाश में मस्त पक्षी उड़ते है
मेरा बदन भी फाड़ फाड़ने लगता है
और चिंतन को पर लग जाते है
जब इन्हें किल्कारिया भरते देखता हूँ
मुजहे अपना बचपन याद आता है
पकड़ने लगता हूँ उस वक़्त को
जब यह वक़्त काटने लगता है
गुलाब के फूल दे देते है
खुशबू हर इक को
मिटाना चाहता हूँ नाम संगदिली
बना देना चाहता हूँ दिलदार हर इक को
CHILDHOOD
कितनी साफ सवच्छ और मनोरम
थी गंगा
जब मैंने उसे
पहेले पडाब पर देखा था
चाहे था रास्ता उबड़ खाबड़ और कट्टिला
जब मैंने उसे अपने बचपन कि दहलीज़
पर आते देखा था
मगर आज बहती मेरी आखो से
मैली मैली बन कर
घुल गयी नफ़रत सबार्थ और
ईर्ष्या इस में खुल कर
कैसे जानु कि यह गंगा ही है
या आखों से टपकता गन्दा पानी
अब जब देखता हूँ दूर उस का पहला पडाब
तो नज़र आती है मुजहे गंगा
और यह सिर्फ पानी
थी गंगा
जब मैंने उसे
पहेले पडाब पर देखा था
चाहे था रास्ता उबड़ खाबड़ और कट्टिला
जब मैंने उसे अपने बचपन कि दहलीज़
पर आते देखा था
मगर आज बहती मेरी आखो से
मैली मैली बन कर
घुल गयी नफ़रत सबार्थ और
ईर्ष्या इस में खुल कर
कैसे जानु कि यह गंगा ही है
या आखों से टपकता गन्दा पानी
अब जब देखता हूँ दूर उस का पहला पडाब
तो नज़र आती है मुजहे गंगा
और यह सिर्फ पानी
MEMORIES
यादों का अपना है चलन
अपनी है दुनिया और अपना है चमन
जब बैठा मैं बक्त को छोड़
यादों के जमखट में आ कर
खुद को पहचाना खुद को पाकर
खोला कभी जो मैंने यादों का झरोखा
चली ठंडी हवाए
और मेरे जख्मो को कुरेदा
उलझे क्यों इन से
इक बहाना से करते है
पीठ करके बैठे है मगर
मुड कर उसी का नज़ारा करते है
बात नहीं कि यहाँ काटों कि ही चुभन है
मचल पड़ते है यहाँ आने को
कि फूलो कि भी खुसबू है
यादे देती है जिंदगी
तो बना देती है मजार
फूल खिले बिन बहार के
या फिर खुसबू न दे
चाहे खिले हज़ार
यादें दूर एक धुआ सा नज़र आता है
छंटता है जब तो एक इन्सान नज़र आता है
छोड़ आये दूर मोड़ पर
जो अब छाया बना साथ चला आता है
दूर हो जाए उस दुनिया से मुमकीन नहीं
मिटा दे अपनी हस्ती
मगर यादों को मिटाना मुमकीन नहीं
छोड़ दू साथ खुद का खुद से
मगर यादों का साथ बरक़रार है
थक जाते है सब इक रह चल कर
इन का मगर हर रह पर साथ है
अपनी है दुनिया और अपना है चमन
जब बैठा मैं बक्त को छोड़
यादों के जमखट में आ कर
खुद को पहचाना खुद को पाकर
खोला कभी जो मैंने यादों का झरोखा
चली ठंडी हवाए
और मेरे जख्मो को कुरेदा
उलझे क्यों इन से
इक बहाना से करते है
पीठ करके बैठे है मगर
मुड कर उसी का नज़ारा करते है
बात नहीं कि यहाँ काटों कि ही चुभन है
मचल पड़ते है यहाँ आने को
कि फूलो कि भी खुसबू है
यादे देती है जिंदगी
तो बना देती है मजार
फूल खिले बिन बहार के
या फिर खुसबू न दे
चाहे खिले हज़ार
यादें दूर एक धुआ सा नज़र आता है
छंटता है जब तो एक इन्सान नज़र आता है
छोड़ आये दूर मोड़ पर
जो अब छाया बना साथ चला आता है
दूर हो जाए उस दुनिया से मुमकीन नहीं
मिटा दे अपनी हस्ती
मगर यादों को मिटाना मुमकीन नहीं
छोड़ दू साथ खुद का खुद से
मगर यादों का साथ बरक़रार है
थक जाते है सब इक रह चल कर
इन का मगर हर रह पर साथ है
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