ठंडी हवा से जब जुल्फ
आँखों पर आती है
कुछ धूप सी होती है
तो चेहरे पर छाब हो जाती है
बारिश कि नन्ही नन्ही बूंदों से
जब तन भीग जाता है
जहन में ताज़गी उभर आती है
मन भी धुल जाता है
जब आंखे हरियाली को अपने
में समां लेती है
पते पर पड़ी बूँद भी
मोती बन जाती है
जिंदगी का एहसास होता है
जब आकाश में मस्त पक्षी उड़ते है
मेरा बदन भी फाड़ फाड़ने लगता है
और चिंतन को पर लग जाते है
जब इन्हें किल्कारिया भरते देखता हूँ
मुजहे अपना बचपन याद आता है
पकड़ने लगता हूँ उस वक़्त को
जब यह वक़्त काटने लगता है
गुलाब के फूल दे देते है
खुशबू हर इक को
मिटाना चाहता हूँ नाम संगदिली
बना देना चाहता हूँ दिलदार हर इक को
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