Sunday, March 20, 2011

THIS IS MY WORLD......

ल्फ्ड़ो पर लफडा
झगड़ो पर झगडा
उस पर टिका है यह जहाँ
हर कमजोर पर बैठा एक तगड़ा यहाँ
चाहे हो फक्कड़
जिस्म से हो लक्कड़
मगर हर चेहरा है धक्कड़ यहाँ
हर दिल है  छोटा और संकरा
जिस में चलता इन्सान लंगड़ा
कितनी ढीली है खुद पर पकड़
कैसे रहेगे आज़ाद 
लगा देते है सारा जोर 
मजबूत करने को दुसरे पर जकड
ल्फ्ड़ो पर लफडा
झगड़ो पर झगडा
उस पर टिका है यह जहाँ................
 
 
            
    

BIRTHDAY....................

कल
वक़्त एक कदम निकल जायेगा 
हमे एक कदम पीछे छोड़ कर
क्यों कर ऐसा होता है
आगे निकल  जाता है
बेअसर
 अपना असर छोड़ कर
 उम्र बदती नहीं हर बार घाट जाती है
इन्ही उलझनों में उलझा कर
हर बार आगे निकल जाता
हमें एक कदम पीछे छोड़ कर
रातभर हँसते हंसाते रहेंगे
सुबह पछतायेंगे
निकर गया आगे चतुर फिर
हमें एक कदम फिर पीछे छोड़ कर
 
 

Saturday, February 26, 2011

mein.... kuch bhi nahi....

मैं कुछ भी नहीं,
कुछ नहीं.....

पर, 
मुझे बना दिया,
यह कैसा भ्रम जगा दिया,
मैं कुछ भी नहीं... कुछ नहीं .....

न कभी में हँसा, न रोया 
पर तुने कभी हँसा, कभी रुला दिया 
यह कैसा भ्रम जगा दिया,
मैं कुछ भी नहीं.... कुछ नहीं...

जो भी किया, तुने किया
और मुझमें मैं होना दिखा दिया,
यह कैसा भ्रम जगा दिया,
मैं कुछ भी नहीं.. कुछ नहीं....

न कभी जीता, पर तुने जीता दिया
न कभी हारा पर तुने हरा दिया,
यह कैसा भ्रम जगा दिया,
मैं कुछ भी नहीं... कुछ नहीं...

जो तूने किया, बस किया
और हमें अच्छा बूरा बता दिया
उलझा दिया, 
यह कैसा भ्रम जगा दिया
मैं कुछ भी नहीं.... कुछ नहीं.....

हर पल है तू ही,
हर जगह है तू ही , बस तू ही
और कुछ भी नहीं,
फिर यह कैसा भ्रम जगा दिया
मैं कुछ भी नहीं.... कुछ नहीं.....
मैं कुछ भी नहीं... कुछ नहीं....

hawa ...............

हवा ओ हवा
मुझे अपना दोस्त बना,
जैसे तू चले, मुझे भी चला
उमंगों में तरंगों में ,
कभी ज़मीन पर, कभी आसमाँ में,
हवा ओ हवा......

मुझे अपना दोस्त बना...
संग पाकर, शायद में भी हवा ही हो जाऊं 
भूल जाऊं खुद को,
में भी तुम हो जाऊं, हवा ओ हवा.....

मौज में, मस्ती में 
लह लहाना तुम्हारा,
या कभी पूर्ण मौन हो जाना तुम्हारा,
मुझे बहुत भाता है
ललचाता है, बस तुम हो जाने को, हवा ओ हवा......

तुम ही हर पल हर जगह, पर
तुम कभी होती नहीं आँखों के सामने 
 बस एक खालीपन होता है ,
या फिर एक हलचल सी फिजा में 
बस,
 मुझ में भी कुछ ऐसा भरदो ना
कि,
मैं ना रहूँ खुद को ना खो कर भी,
हवा हो हवा......

हवा होना, बस खुदा होना
खुद से ना खुद का जुदा होना,
अपनी ही एक-एक रग में हो आना जाना
यही है हवा में हवा होना,
हवा ओ हवा,
मुझे अपना दोस्त बना..... 

Monday, August 9, 2010

KIDDIES

I  LOVE KIDDIES
EVERYONE DOES
WHO DON'T WHO IS
IF DESIRES SEE GOD IN THEM
GET 'HIS' LOVE BY LOVING THEM
THEY  ARE TEEN
ONLY LOVE WHAT THEY KEEN
LARKING AND SWINGING AS
LARK SPURS FLOWERS IN SPRING
REJOICING IN TORSION AS MUCH
AS NOT MAY BE KING.

LIFE

ठंडी  हवा  से  जब  जुल्फ
आँखों पर आती है
कुछ धूप सी होती है
तो चेहरे पर छाब हो जाती है
बारिश कि नन्ही नन्ही बूंदों से
जब तन भीग जाता है
जहन में ताज़गी उभर आती है
मन भी धुल जाता है
जब आंखे हरियाली को अपने
 में समां लेती है
पते पर पड़ी बूँद भी
मोती बन जाती है
जिंदगी का एहसास होता है
जब आकाश में मस्त पक्षी उड़ते है
मेरा बदन भी फाड़ फाड़ने लगता है
और चिंतन को पर लग जाते है
जब इन्हें किल्कारिया  भरते देखता हूँ 
मुजहे अपना बचपन याद आता है
पकड़ने लगता हूँ उस वक़्त को
जब यह वक़्त काटने लगता है
गुलाब के फूल दे देते है
खुशबू हर इक को
मिटाना चाहता हूँ नाम संगदिली
बना देना चाहता हूँ दिलदार हर इक को

CHILDHOOD

कितनी साफ सवच्छ और मनोरम
थी गंगा
जब मैंने उसे
पहेले पडाब पर देखा था
चाहे  था रास्ता उबड़ खाबड़ और कट्टिला
जब मैंने उसे अपने बचपन कि दहलीज़
पर आते देखा था
मगर आज बहती मेरी आखो से
मैली मैली बन कर
घुल गयी नफ़रत सबार्थ और
ईर्ष्या इस में खुल कर
कैसे जानु कि यह गंगा ही है
या आखों से टपकता गन्दा पानी
अब जब देखता हूँ दूर उस का पहला पडाब
तो नज़र आती है मुजहे गंगा
और यह सिर्फ पानी