ल्फ्ड़ो पर लफडा
झगड़ो पर झगडा
उस पर टिका है यह जहाँ
हर कमजोर पर बैठा एक तगड़ा यहाँ
चाहे हो फक्कड़
जिस्म से हो लक्कड़
मगर हर चेहरा है धक्कड़ यहाँ
हर दिल है छोटा और संकरा
जिस में चलता इन्सान लंगड़ा
कितनी ढीली है खुद पर पकड़
कैसे रहेगे आज़ाद
लगा देते है सारा जोर
मजबूत करने को दुसरे पर जकड
ल्फ्ड़ो पर लफडा
झगड़ो पर झगडा
उस पर टिका है यह जहाँ................
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