Sunday, March 20, 2011

THIS IS MY WORLD......

ल्फ्ड़ो पर लफडा
झगड़ो पर झगडा
उस पर टिका है यह जहाँ
हर कमजोर पर बैठा एक तगड़ा यहाँ
चाहे हो फक्कड़
जिस्म से हो लक्कड़
मगर हर चेहरा है धक्कड़ यहाँ
हर दिल है  छोटा और संकरा
जिस में चलता इन्सान लंगड़ा
कितनी ढीली है खुद पर पकड़
कैसे रहेगे आज़ाद 
लगा देते है सारा जोर 
मजबूत करने को दुसरे पर जकड
ल्फ्ड़ो पर लफडा
झगड़ो पर झगडा
उस पर टिका है यह जहाँ................
 
 
            
    

BIRTHDAY....................

कल
वक़्त एक कदम निकल जायेगा 
हमे एक कदम पीछे छोड़ कर
क्यों कर ऐसा होता है
आगे निकल  जाता है
बेअसर
 अपना असर छोड़ कर
 उम्र बदती नहीं हर बार घाट जाती है
इन्ही उलझनों में उलझा कर
हर बार आगे निकल जाता
हमें एक कदम पीछे छोड़ कर
रातभर हँसते हंसाते रहेंगे
सुबह पछतायेंगे
निकर गया आगे चतुर फिर
हमें एक कदम फिर पीछे छोड़ कर